लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन की बात होती है तो इक्विटी का जिक्र जरूर होता है। अगर आपने 1978 में एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स में 1 लाख रुपए का निवेश किया होगा तो अब यह राशि 4.04 करोड़ रुपए हो जाती। पिछले 41 साल में 16% का सीएजीआर मिला है। इसलिए हमेशा सलाह दी जाती है कि लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने निवेश का ज्यादा हिस्सा इक्विटी में लगाएं।
इक्विटी में निवेश को बढ़ावा देने आयकर में छूट का प्रावधान भी है। इक्विटी लिक्डं सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस) में निवेश पर टैक्स में छूट दी जाती है। ऐसे फंड इक्विटी ऑरिएंटेड होते हैं। आयकर की धारा 80सी के तहत मौजूदा समय में साल में 1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है। ऐसे फंड में निवेश की तारीख से तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इनमें निवेश की 65% राशि इक्विटी और इक्विटी से जुड़ी सिक्योरिटीज में लगाई जाती है। 80सी के तहत निवेश के जितने भी विकल्प हैं उनमें सबसे कम लॉक इन पीरियड ईएलएसएस में ही होता है।
पीपीएफ, 5 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट, नेशनल सेविंग्स सर्फिटि केट आदि में इससे ज्यादा लॉक इन पीरियड होता है। इसलिए वेल्थ क्रिएशन के साथ-साथ टैक्स सेविंग के लिए ईएलएसएस ज्यादा पसंदीदा विकल्प बन जाता है। ईएलएसएस की लोकप्रियता का अंदाजा 1.23 करोड़ इन्वेस्टर फोलियो से भी लगता है। यह कुल इक्विटी फोलियो का करीब 20% है। 30 नवंबर 2019 तक ईएलएसएस में निवेश का टोटल एसेट अंडर मैनजेमेंट (एयूएम) 1.03 लाख करोड़ था। निवेशक ईएलएसएस फंड में निवेश के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी का विकल्प भी चुन सकते हैं। इससे वे अपनी टैक्स प्लानिंग और वित्तीय लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
10 साल में ईएलएसएस ने 11.25% का रिटर्न दिया
10 साल में एसआईपी निवेश से ईएलएसएस ने एसएंडपी सेंसेक्स को भी पीछे छोड़ा। ईएलएसएस फंड ने 10 सालों में 11.25% सीएजीआर रिटर्नदिया। एसएंडपी सेंसेक्स ने इसी दौरान 10.15% का रिटर्न दिया। ईएलएसएस से रिटर्न पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के तहत 10% की दर से टैक्स लगता है।