तुरंत खरीदना-बेचना कम फायदेमंद, सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट से ज्यादा रिटर्न

हम बड़े भारतीय निवेशकों के व्यवहार और प्रदर्शन पर प्रभाव का एनालिसिस करेंगे। 16 वर्षों (2003-19) की अवधि के लिए निवेशक व्यवहार का विश्लेषण देखेंगे। विश्लेषण, इक्विटी और मल्टी-एसेट (हाइब्रिड) फंड्स के लिए अलग-अलग किया गया है।



साथ ही 10 साल (2009 से 2019) की अवधि में डेट फंड में निवेशक का विश्लेषण किया गया है। यहां मुख्य रूप से लॉन्ग टर्म निवेश को लेकर बात की गई है। एक्सिस म्यूचुअल फंड ने भारतीय निवेशकों के उनके दीर्घकालिक प्रदर्शन पर खरीद-बिक्री के निर्णयों के प्रभाव पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इंवेस्टमेंट फ्लो स्थिर नहीं है बल्कि यह मार्केट परफॉर्मेंस को फॉलो करता है। परिणामस्वरूप उनके वास्तविक रिजल्ट ज्यादा खराब होते हैं। अगर वह बाजार के उतार चढ़ाव के साथ तुरंत खरीदने बेचने की बजाय उसको होल्ड करते या सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट स्ट्रेटजी अपनाते तो ज्यादा बेहतर परिणाम होता। यह प्रभाव अलग अलग टाइम में ऐसे ही बना हुआ है। पिछले 15 सालों में निवेशकों के इस व्यवहार में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। निवेशकों को अपने निवेश से सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आर्डर करते समय अनुशासित और दीर्घकालिक सोच रखने की आवश्यकता है। कम समय-सीमा के निवेश का भी रिजल्ट एक जैसा ही रहा।



यहां, हमने विभिन्न निवेश, एकमुश्त (बाई एंड गोल्ड) और व्यवस्थित नियमित निवेश (जैसे एसआईपी) के तहत फंड रिटर्न को भी देखा। एक बार फिर निवेशकों को रिटर्न इससे लॉन्ग टर्म पैटर्न के अनुसार खराब ही मिला। सिस्टमेटिक प्रोग्राम में निवेश के दूसरे भी बहुत सारे फायदे हैं। खास कर उनके लिए जिनके पास कैश फ्लो मंथली या क्वार्टर आधार पर रेगुलर है। वह निवेश को जारी रखने के लिए नियमित समय पर किश्त जमा करते रहते हैं।



शॉर्ट टर्म के बजाय लॉन्ग टर्म में मुनाफे की नीति अपनाएं
बाजार के उतार चढ़ाव को देखकर, जल्दी लाभ कमाने निवेशक बेवजह उत्साहित होते हैं और नुकसान उठाते है। निवेशक कम अवधि से लाभ पर ज्यादा फोकस करते हैं लिहाजा लॉन्ग टर्म से होने वाले लाभ को गंवा देते हैं। निवेश की योजनाएं देर से बनाने की वजह से ज्यादा लाभ नहीं कमा पाते।